सरसों में सल्फर देना क्यों जरूरी है
सरसों (Mustard) की फसल में सल्फर देना बहुत जरूरी माना जाता है, क्योंकि यह फसल सल्फर–प्रेमी (Sulphur loving crop) होती है। सरसों में सल्फर देना क्यों जरूरी है?*
1. तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए
सरसों में सल्फर देने से तेल की मात्रा (Oil Content) 4–8% तक बढ़ जाती है। सल्फर तेल बनने की प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभाता है।
2. दाना (सीड) मोटा व चमकदार बनता है
सल्फर की कमी होने पर दाने छोटे, सिकुड़े हुए और कम वजन वाले बनते हैं। सल्फर देने से दाना भराव अच्छा होता है।
3. पैदावार में बढ़ोतरी
सल्फर देने से फूल अधिक लगते हैं, फलियां ज्यादा बनती हैं, जिससे कुल उपज (Yield) 15–30% तक बढ़ सकती है।
4. पौधे को गहरा हरा रंग और मजबूत वृद्धि
सल्फर प्रोटीन बनाने में मदद करता है। इससे पौधा मजबूत, गहरा हरा और स्वस्थ दिखता है।
5. रोगों से बचाव
सल्फर देने से पौधा मजबूत होता है और अल्टरनेरिया ब्लाइट जैसे रोगों का प्रकोप कम होता है।
6. मिट्टी में सल्फर की कमी आम है
ज्यादातर खेतों में नाइट्रोजन–फास्फोरस तो मिलता है लेकिन सल्फर की कमी पाई जाती है, इसलिए सल्फर देना जरूरी हो जाता है।
सल्फर कब और कितना दें? मिट्टी में*
बेसल डोज: 20–25 किलोग्राम सल्फर/एकड़
रूप: बेंटोनाइट सल्फर (90%) या SSP (Single Super Phosphate)
स्प्रे के लिए:
20–25 दिन पर 3–5 ग्राम/लीटर सल्फर SP 80% का छिड़काव कर सकते हैं।