झारखंड में धान कब से होगा धान खरीदी, क्या है नियमावली

झारखंड में धान कब से होगा धान खरीदी, क्या है नियमावली

 

**झारखंड में धान (पैडी) खरीद कब से शुरू होगी और नियमावली/महत्वपूर्ण बातें (2025-26 खरीफ विपणन मौसम)**

 

धान खरीद कब से होगी

झारखंड सरकार ने घोषणा की है कि राज्य में धान की सरकारी खरीद 15 दिसंबर 2025 से शुरू होगी। यह तारीख खरीफ विपणन मौसम (पीकेएम) 2025-26 के लिए तय की गई है।

 

 

धान की कीमत (MSP + बोनस)

केंद्रीय MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) के अनुसार सामान्य धान का MSP ₹2,369/- प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का ₹2,389/- प्रति क्विंटल तय है।

 

 

झारखंड सरकार किसानों को MSP के ऊपर ₹100 प्रति क्विंटल का बोनस देगी। यानी कुल मूल्य लगभग इन्‍हीं MSP+बोनस के हिसाब से मिलेगा।

 

 

(कुछ रिपोर्ट में बोनस ₹81/- भी बताया गया है, यह कैबिनेट निर्णय पर आधारित हो सकता है – ₹2,450 कुल मूल्य का जिक्र भी है)

 

 

मुख्य नियम/प्रक्रिया

नीचे सामान्य तौर पर वह नियम/प्रक्रिया है जो सरकारी धान खरीद कार्यक्रम में लागू रहती है (झारखंड के संदर्भ में भी):

 

पंजीकरण:

किसानों को धान बेचने के लिए पहले ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीकरण करना होता है। इससे सरकारी खरीद केंद्र पर धान बेचने का अधिकार मिल जाता है।

 

 

क्वालिटी और वज़न मापन:

धान को सरकारी खरीद केंद्र पर पंजीकृत अधिकारी द्वारा मोइस्चर, क्वालिटी जांच और वज़न के आधार पर खरीदा जाता है।

 

भुगतान:

इस साल सरकार ने एकमुश्त भुगतान की व्यवस्था की है, यानी किसान को धान बेचते ही पूरी राशि एक बार में मिल सकती है, न कि किश्तों में।

 

समय सीमा:

खरीद के लिए आमतौर पर एक निर्धारित सेज़न/अंतिम तिथि रहती है। पिछले साल यह 30 अप्रैल तक बढ़ाई गई थी।

 

 

बिचौलियों पर नियंत्रण:

सरकार कुछ मामलों में बिचौलियों पर रोक और निगरानी भी लगाती है ताकि किसान को MSP/बोनस का पूरा फ़ायदा मिले।

 

 

राज्य सरकार के फैसले और विवाद

हाल ही में विधानसभा सत्र में धान खरीद में देरी को लेकर हंगामा भी हुआ है, क्योंकि सरकारी खरीद अभी शुरू नहीं हुई थी।

 

सरकार ने किसानों का समर्थन सुनिश्चित करने के लिए MSP पर बोनस और तेज़ भुगतान नीति अपनाने का निर्णय लिया है।

 

संक्षेप में

विषय विवरण

धान खरीद शुरू 15 दिसंबर 2025 से सरकारी खरीद शुरू होगी

Ruralvoice

 

MSP + बोनस केंद्रीय MSP + राज्य बोनस (लगभग ₹100/- प्रति क्विंटल)

Ruralvoice

भुगतान एकमुश्त भुगतान प्रणाली

Ruralvoice

पंजीकरण ई-उपार्जन पोर्टल पर नियंत्रण

अगर आप चाहें, मैं धान खरीद केंद्रों की सूची या अपने जिले के लिए खरीद की अंतिम तिथि/समय सारिणी भी खोजकर दे सकता हूँ। बस अपना जिला का नाम बताइए।

जैविक खेती कैसे करें

जैविक खेती कैसे करेंó

जैविक खेती (Organic Farming) करने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका यह है कि आप रसायन-मुक्त, प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित खेती प्रणाली अपनाएँ। नीचे मैं पूरी प्रक्रिया सरल भाषा में बता रहा हूँ:

जैविक खेती कैसे करें? (Step-by-Step Guide)

1.भूमि की तैयारी

खेत में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग बंद करें।

गोबर खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद (सन, ढैंचा) डालें।

मिट्टी की जांच कर pH संतुलित रखें।

जैविक खेती में soil fertility अपने-आप बढ़ती है।

2.बीज का चयन

देसी या ऑर्गेनिक प्रमाणित बीज का उपयोग करें।

बोने से पहले बीज को जीवामृत, गौमूत्र, नीमास्त्र से उपचारित करें।

3.जैविक खाद का उपयोग

मुख्य जैविक उर्वरक:

गोबर खाद / कम्पोस्ट

वर्मी कम्पोस्ट

जीवामृत (गाय का गोबर + गौमूत्र + गुड़ + बेसन + मिट्टी)

घन जीवामृत

नीम खली

तम्बाकू घोल

बोनमील, फिशमील (जैविक N-P-K स्रोत)

4. कीट व रोग नियंत्रण (बिना रसायन)

प्राकृतिक कीटनाशक:

नीमास्त्र

अग्नि अस्त्र (लहसुन + मिर्च + गौमूत्र)

ब्रह्मास्त्र (कई जड़ी-बूटियों का मिश्रण)

दूध-छाछ स्प्रे (fungus control)

तंबाकू घोल

लहसुन-मिर्च का काढ़ा

ये सब पौधों को सुरक्षित रखते हैं और उपज भी अच्छी मिलती है।

5. जल प्रबंधन

ड्रिप सिंचाई का उपयोग करें—पानी कम लगता है।

मल्चिंग (घास, भूसा, प्लास्टिक) करें—नमी बनी रहती है।

फसल चक्र (Crop Rotation) अपनाएँ

हर सीजन एक ही फसल न उगाएँ।

उदाहरण:

खरीफ – मक्का / सोयाबीन

रबी – गेहूं / चना

ग्रीष्म – मूंग / सब्जी

इससे मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बना रहता है।

ग्रीन मैन्योरिंग (हरी खाद)

ढैंचा, सन, मूंग, सनई जैसी फसल काटकर मिट्टी में मिला दें।

इससे मिट्टी में नाइट्रोजन, कार्बन और जैविक पदार्थ बढ़ते हैं।

पशुधन को खेती का हिस्सा बनाएं

गौमूत्र, गोबर, गोबर-गैस इकाई, देशी गाय—all parts of organic system.

इससे लागत घटती है, खेत उपजाऊ बनता है।

 

प्रमाणन (Organic Certification)

अगर आप प्रोडक्ट बेचने के लिए जैविक प्रमाणन चाहते हैं:

PGS-India (सबसे आसान और मुफ्त सेल्फ-सर्टिफिकेशन)

NPOP Certification (Export Level)


मिट्टी उपजाऊ बनती है

लागत 30–50% कम

फसल की कीमत ज्यादा मिलती है

खेती लंबे समय तक टिकाऊ रहती है

स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है

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सरसों में सल्फर देना क्यों जरूरी है 

सरसों में सल्फर देना क्यों जरूरी है

सरसों (Mustard) की फसल में सल्फर देना बहुत जरूरी माना जाता है, क्योंकि यह फसल सल्फर–प्रेमी (Sulphur loving crop) होती है। सरसों में सल्फर देना क्यों जरूरी है?*

1. तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए

सरसों में सल्फर देने से तेल की मात्रा (Oil Content) 4–8% तक बढ़ जाती है। सल्फर तेल बनने की प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभाता है।

2. दाना (सीड) मोटा व चमकदार बनता है

सल्फर की कमी होने पर दाने छोटे, सिकुड़े हुए और कम वजन वाले बनते हैं। सल्फर देने से दाना भराव अच्छा होता है।

3. पैदावार में बढ़ोतरी

सल्फर देने से फूल अधिक लगते हैं, फलियां ज्यादा बनती हैं, जिससे कुल उपज (Yield) 15–30% तक बढ़ सकती है।

4. पौधे को गहरा हरा रंग और मजबूत वृद्धि

सल्फर प्रोटीन बनाने में मदद करता है। इससे पौधा मजबूत, गहरा हरा और स्वस्थ दिखता है।

5. रोगों से बचाव

सल्फर देने से पौधा मजबूत होता है और अल्टरनेरिया ब्लाइट जैसे रोगों का प्रकोप कम होता है।

6. मिट्टी में सल्फर की कमी आम है

ज्यादातर खेतों में नाइट्रोजन–फास्फोरस तो मिलता है लेकिन सल्फर की कमी पाई जाती है, इसलिए सल्फर देना जरूरी हो जाता है।

सल्फर कब और कितना दें? मिट्टी में*

 

बेसल डोज: 20–25 किलोग्राम सल्फर/एकड़

 

रूप: बेंटोनाइट सल्फर (90%) या SSP (Single Super Phosphate)

 

स्प्रे के लिए:

 

20–25 दिन पर 3–5 ग्राम/लीटर सल्फर SP 80% का छिड़काव कर सकते हैं।

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ऑर्गेनिक फार्मिंग (Organic Farming) कैसे करें?

ऑर्गेनिक फार्मिंग (Organic Farming) कैसे करें?

ऑर्गेनिक फार्मिंग (Organic Farming) कैसे करें? – इसका मतलब है कि खेती बिना रासायनिक खाद, कीटनाशक और कृत्रिम चीज़ों के की जाए, ताकि मिट्टी, पौधे, इंसान और पर्यावरण सभी स्वस्थ रहें।

नीचे आसान हिंदी में पूरी जानकारी दी गई है:


🌾 ऑर्गेनिक खेती क्या होती है?

ऑर्गेनिक खेती एक प्राकृतिक खेती है जिसमें:

  • रासायनिक खाद (Urea, DAP, आदि) का उपयोग नहीं किया जाता।

  • कीटनाशकों की जगह नीम, गोमूत्र, जीवामृत आदि का उपयोग होता है।

  • फसल की गुणवत्ता और पोषण बेहतर होता है।

  • मिट्टी की उर्वरता और जल-धारण क्षमता बनी रहती है।


✅ ऑर्गेनिक खेती कैसे शुरू करें?

1. जमीन की तैयारी (Soil Preparation)

  • रासायनिक खादों का प्रयोग बंद करें।

  • 2–3 साल तक प्राकृतिक तरीके से जमीन को सुधारा जाए।

  • गोबर की सड़ी हुई खाद (खली खाद), कम्पोस्ट और वर्मी कम्पोस्ट डालें।

2. प्राकृतिक खाद का प्रयोग करें

  • गोबर की खाद

  • वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद)

  • हरी खाद (Green Manure) – जैसे सन, ढैंचा

  • जीवामृत, घनजीवामृत (गौ आधारित खादें)

3. प्राकृतिक कीटनाशक (Pest Control)

  • नीम तेल, लहसुन-मिर्च घोल, गोमूत्र, ब्रह्मास्त्र आदि का छिड़काव।

  • फेरोमोन ट्रैप, पीली चिपचिपी पट्टी (Yellow Sticky Traps) लगाएं।

4. बीज चयन और उपचार (Seed Selection & Treatment)

  • देसी और रोग प्रतिरोधक बीज लें।

  • बीज को गौमूत्र, नीम अर्क या जीवामृत से उपचारित करें।

5. फसल चक्र अपनाएं (Crop Rotation)

  • एक ही फसल बार-बार न लगाएं।

  • इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और कीट भी नहीं लगते।

6. मल्चिंग (Mulching) करें

  • सूखी पत्तियां, भूसा या घास को खेत में बिछाएं ताकि नमी बनी रहे और खरपतवार न फैले।


🌱 ऑर्गेनिक खेती में उपयोगी देसी घोल:

नाम उपयोग बनाने की विधि
जीवामृत खाद के रूप में 10 लीटर गोमूत्र + 10 किलो गोबर + 2 मुट्ठी चना बेसन + 1 किलो गुड़ + 200 लीटर पानी
नीमास्त्र कीट नियंत्रण 5 किलो नीम पत्ता + 1 लीटर गोमूत्र + 200 ग्राम लहसुन को पीसकर 10 लीटर पानी में मिलाएं
अग्नि अस्त्र कीटनाशक लहसुन + हरी मिर्च + अदरक + गोमूत्र
ब्रह्मास्त्र सभी प्रकार के कीटों पर असर नीम, धतूरा, आक, तुलसी, गुड़हल आदि पत्ते उबालकर घोल बनाएं

📜 प्रमाणन (Certification)

अगर आप ऑर्गेनिक फसल बेचकर अच्छी कीमत पाना चाहते हैं, तो आपको ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन लेना चाहिए:

  • PGS India (Participatory Guarantee System) – छोटे किसानों के लिए मुफ़्त है।

  • NPOP (National Programme for Organic Production) – निर्यात के लिए जरूरी।


💰 लाभ (Organic Farming ke Fayde)

  • फसल की गुणवत्ता अधिक।

  • बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।

  • मिट्टी, जल और पर्यावरण की रक्षा होती है।

  • किसान और ग्राहक दोनों स्वस्थ रहते हैं।

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